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चीन के राष्ट्रपति से मोदी की मुलाकातों के बाद मिले 20 सैनिकों के शव: शांता

पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा है कि नेहरू के हिंदी चीनी भाई-भाई नारे के बाद 1962 का आक्रमण मिला। अटल की बस में लाहौर यात्रा के बाद कारगिल युद्ध मिला और अब पीएम मोदी की चीन राष्ट्रपति से चार मुलाकातों के बाद बीस जवानों के शव मिले हैं। शांता ने कहा कि 1947 से 1950 के बीच के तीन सालों में हुईं दो बड़ी गलतियां पता नहीं भारत को कितने सालों तक रुलाती रहेंगी।

भारत का विभाजन होने के बाद पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण किया। एक बड़ा भूभाग हथिया लिया। पहली बड़ी गलती भारत ने तब की, जब कश्मीर के मामले को राष्ट्र संघ में ले गए। युद्ध विराम करना पड़ा और वह क्षेत्र आज तक पाकिस्तान के अधिकार में है। पाक आतंकवाद लगातार जवानों का बलिदान ले रहा है। हमीरपुर के जवान अंकुश ठाकुर को देखकर आंखें बरसने लगती हैं।

कहा कि सब शहीदों को मेरी श्रद्धांजलि। 1950 में चीन ने तिब्बत पर आक्रमण किया, हजारों की हत्या की। महामहिम दलाईलामा भागकर भारत आए। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे बहुत से देश चाहते थे कि भारत तिब्बत प्रश्न को राष्ट्र संघ में उठाए। वे सब सहायता करना चाहते थे। महामहिम दलाईलामा के प्रति विश्व भर में बड़ी श्रद्धा थी। लेकिन भारत ने राष्ट्र संघ में प्रश्न नहीं उठाया।

तिब्बत को चीन का हिस्सा स्वीकार कर दूसरी बड़ी गलती की।  इतना ही नहीं, 1904 में यंग मिशन के नाम से भारत की सेना तिब्बत गई। आराम से ल्हासा तक पहुंच गई। लेकिन आजाद भारत की सरकार ने तिब्बत को चीन देश का हिस्सा स्वीकार कर लिया। इतिहास की इन दो गलतियों का भारत को बहुत मूल्य चुकाना पड़ा है। हजारों बलिदान देने पड़े हैं। 


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